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Pooja booking

गया में ऑनलाइन पिंडदान

4.5 Rating: 22 reviews · For this pooja
Your pooja, personally arranged

Original price was: ₹21,000.00.Current price is: ₹11,000.00.

Per pooja

Applicable taxes are shown in your booking. Optional additions are separate.

Verified Pandits 2019 से All Samagri Included Cancellation Policy

Package details

  • गया में ऑनलाइन पिंडदान (फल्गु क्षेत्र / विष्णुपद क्षेत्र पर)
  • अनुभवी गयावाल पंडित
  • सम्पूर्ण पूजा सामग्री
  • प्रतिनिधि (Pratinidhi) द्वारा आपकी ओर से पूजा
  • आपके नाम, गोत्र एवं पितरों के नाम से संकल्प
  • लाइव वीडियो कॉल (WhatsApp / Zoom / Google Meet)
  • रिकॉर्डेड मीटिंग (केवल Google Meet / Zoom — 72 घंटे के अंदर)

शामिल नहीं:-

  • गया में भौतिक उपस्थिति (यह ऑनलाइन सेवा है)
  • तर्पण / ब्राह्मण भोज / गौ दान (अलग सेवा / ऐड-ऑन)
  • नारायण बलि / त्रिपिंडी श्राद्ध (अलग सेवा)
  • पंडित/पुजारी को अतिरिक्त दक्षिणा / उपहार / दान

Thoughtfully arranged, personally guided

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What Families Say

4.5

22 reviews · For this pooja

30 family reviews22 for this pooja · 8 from across our services

बहुत ही अच्छी तरह से पिंडदान का कार्य संपन्न हुआ आज, यात्रा करने में असमर्थ लोगों के लिए बहुत ही अच्छा विकल्प दिया है आपने। महामारी के इस दौर में भी धर्मकार्य बाधित नहीं हुआ है। हम लोग बहुत ज्यादा संतुष्ट हैं । जय विष्णु

अल्पना तिवारी Online Pind Daan in Gaya Verified booking

बहुत अच्छा काम हुआ। कोरोना में आना मुश्किल था। घर बैठे ऑनलाइन गया श्राद्ध हो गया। बहुत बहुत धन्यवाद। मन को शांति मिला।

भोलानाथ Online Pind Daan in Gaya Verified booking
Watching the pandit perform the rituals in real-time by the Falgu River, mentioning my father's name... it felt like we were truly there. Immense gratitude to the entire team.
Anand Joshi USA Pind Daan at Gaya Verified booking
Being in the USA, travelling to India just for Tarpan during Pitru Paksha was becoming very difficult. Prayag Pandits offered a well-coordinated solution.
Parvathi USA Tarpan Verified booking
I was skeptical about performing such a sacred ritual online from Canada. But honouring my parents in Kashi was important. They were very patient and answered all my questions.
Radha Ravi Canada Online Puja Verified booking
Living in Singapore, we felt disconnected from these essential rituals. The live stream option for Tarpan at Prayagraj gave us a profound sense of connection and peace.
Praveen Singapore Tarpan at Prayagraj Verified booking
It was deeply important for us in Australia that the rituals were performed correctly. The ceremony reflected the authenticity we sought and was performed by a knowledgeable priest.
Bhargavi UK Asthi Visarjan Verified booking
The Pind Daan at Kashi was handled carefully, with the pandit following every step diligently. Very reassuring.
Snehal Ramesh Canada Pind Daan at Varanasi Verified booking
Arranging Asthi Visarjan from Bhubaneswar seemed complex, but Prayag Pandits made it seamless. The pandit called us before the ceremony to explain every step. Very professional.
Subhash Mohapatra Odisha Asthi Visarjan at Prayagraj Verified booking
During Pitru Paksha, we booked Shradh at Prayagraj. The coordination was flawless - from date selection to the pandit assignment. Our family felt at peace after the ceremony.
Meera Sharma Delhi NCR Shradh at Prayagraj Verified booking
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  4. Participate in your pooja

    Follow the participation and joining arrangements described in your package and shared by your coordinator.

Know your ceremony

गया धाम — जहाँ पितरों को मुक्ति मिलती है। भारत के सभी तीर्थस्थलों में गया का स्थान अत्यन्त विशेष है। यहाँ पिंडदान करने से पितरों को सद्गति प्राप्त होती है और वंशजों को पित्र दोष से मुक्ति मिलती है। यदि आप गया स्वयं नहीं आ सकते, तो प्रयाग पंडित्स की ऑनलाइन पिंडदान सेवा के माध्यम से घर बैठे Zoom या WhatsApp वीडियो कॉल पर यह पवित्र कार्य संपन्न करा सकते हैं। हमारे अनुभवी पंडित जी फल्गु नदी के घाट पर स्वयं उपस्थित रहते हैं और सम्पूर्ण विधि-विधान से आपके पूर्वजों का पिंडदान करते हैं।

गया में पिंडदान का महत्व — शास्त्र क्या कहते हैं

गरुड़ पुराण में स्पष्ट उल्लेख है — “गयायां पिण्डदानेन पितरः स्वर्गमाप्नुयुः।” अर्थात गया में पिंडदान करने से पितरों को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। वायु पुराण में भी गया को “पितृतीर्थ” कहा गया है — वह तीर्थ जो विशेष रूप से पितरों के उद्धार के लिए बनाया गया है।

गया में फल्गु नदी का विशेष महत्व है। रामायण की कथा के अनुसार, भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने भी यहाँ महाराज दशरथ का पिंडदान किया था। कहा जाता है कि माता सीता ने स्वयं फल्गु नदी के तट पर बालू से पिंड बनाकर महाराज दशरथ को पिंडदान दिया था। इसीलिए फल्गु नदी पर किया गया पिंडदान सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

महाभारत के वन पर्व में भी गया माहात्म्य का वर्णन है। भगवान धर्मराज युधिष्ठिर को ऋषि लोमश ने बताया था कि गया में एक बार पिंडदान करने से सात पीढ़ियों के पितरों को मुक्ति मिलती है। विष्णु पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति गया में पिंडदान करता है, उसके कुल में कोई भी व्यक्ति नरक की यातना नहीं भोगता।

गया में विष्णुपद मंदिर के पास स्थित फल्गु नदी का वह घाट जहाँ पिंडदान होता है, उसे “प्रेत शिला” और “रामशिला” क्षेत्र के निकट माना जाता है। यह भूमि भगवान विष्णु के चरण-चिह्न से पवित्र है, इसीलिए यहाँ का पिंडदान अन्य सभी तीर्थों से अधिक फलदायक है।

ऑनलाइन पिंडदान — यह कैसे काम करता है

आधुनिक समय में अनेक परिवार विदेश में बसे हैं, कुछ स्वास्थ्य कारणों से यात्रा नहीं कर सकते, और कुछ के पास समय की कमी है। ऐसे सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रयाग पंडित्स ने ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था की है। यह सेवा पूर्णतः विधि-सम्मत है और इसमें किसी प्रकार की कमी नहीं की जाती।

ऑनलाइन पिंडदान की चरण-दर-चरण प्रक्रिया

  • चरण 1 — बुकिंग और जानकारी संग्रह: आप हमसे संपर्क करें। हम आपसे पितरों के नाम, गोत्र, मृत्यु तिथि और संकल्प के लिए आवश्यक जानकारी लेते हैं।
  • चरण 2 — तिथि निर्धारण: पंडित जी पंचांग देखकर उचित तिथि निर्धारित करते हैं — अमावस्या, पितृपक्ष, या अन्य पुण्य तिथि पर करना सर्वोत्तम होता है।
  • चरण 3 — सामग्री तैयारी: पंडित जी गया में फल्गु नदी घाट पर सम्पूर्ण पूजन सामग्री — काले तिल, जौ, चावल, कुशा, गंगाजल, पुष्प, दूर्वा, धूप — स्वयं लाते हैं।
  • चरण 4 — वीडियो कॉल: निर्धारित समय पर हमारे पंडित जी Zoom या WhatsApp वीडियो कॉल से आपको जोड़ते हैं। आप घर बैठे पूरी पूजा देख सकते हैं और संकल्प में सहभागी बन सकते हैं।
  • चरण 5 — संकल्प: पंडित जी आपसे आपका नाम, गोत्र और पितरों का नाम बुलवाकर संकल्प करवाते हैं। आप घर पर बैठकर भी संकल्प वाक्य दोहरा सकते हैं।
  • चरण 6 — पिंडदान विधि: पंडित जी फल्गु नदी के तट पर विधिवत पिंड बनाकर, वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ पितरों को पिंडदान अर्पित करते हैं।
  • चरण 7 — तर्पण और अंतिम आहुति: पिंडदान के बाद तर्पण (जल अर्पण) किया जाता है और पितरों से सद्गति की प्रार्थना की जाती है।
  • चरण 8 — वीडियो और प्रमाण पत्र: सम्पूर्ण पूजा का वीडियो रिकॉर्ड करके आपको भेजा जाता है।

पिंडदान सेवा में क्या शामिल है

₹21,000 की इस सेवा में सम्पूर्ण पूजन सामग्री और पंडित जी का पारिश्रमिक सम्मिलित है। आपको अलग से कुछ नहीं भेजना होता।

  • फल्गु नदी घाट पर पिंडदान की सम्पूर्ण विधि
  • काले तिल, जौ, चावल, कुशा, गंगाजल — सभी पूजन सामग्री
  • अनुभवी, वेदपाठी पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण सहित पिंडदान
  • Zoom या WhatsApp वीडियो कॉल की सुविधा
  • संकल्प में आपकी सहभागिता
  • सम्पूर्ण पूजा का वीडियो रिकॉर्डिंग
  • पंडित जी द्वारा पूजा के बाद का प्रसाद (यदि आप चाहें तो डाक से मँगवा सकते हैं)
  • पूजा के बाद पंडित जी से व्यक्तिगत परामर्श — यदि कोई जिज्ञासा हो

कौन पिंडदान कर सकता है — अधिकार और नियम

हिन्दू धर्मशास्त्र में पिंडदान का अधिकार निम्नलिखित व्यक्तियों को प्राप्त है:

प्राथमिक अधिकारी

  • ज्येष्ठ पुत्र (बड़ा बेटा): शास्त्रों में सबसे पहला अधिकार बड़े पुत्र को दिया गया है। “पुत्रात् नास्ति परो बन्धुः” — पुत्र से बड़ा कोई बंधु नहीं।
  • अन्य पुत्र: यदि ज्येष्ठ पुत्र उपलब्ध न हो, तो कनिष्ठ पुत्र भी पिंडदान कर सकते हैं।
  • पत्नी: पति की मृत्यु के बाद पत्नी पिंडदान कर सकती है। रामायण में माता सीता द्वारा महाराज दशरथ का पिंडदान इसका प्रमाण है।

विशेष परिस्थितियों में

  • पुत्री: यदि कोई पुत्र न हो, तो पुत्री पिंडदान कर सकती है। कई शास्त्रों में इसकी अनुमति दी गई है।
  • पुत्र का पुत्र (पौत्र): पिता की अनुपस्थिति में पौत्र भी यह कार्य कर सकता है।
  • भतीजा या भाई: यदि सीधे वंशज उपलब्ध न हों, तो गोत्र के अन्य सदस्य पिंडदान कर सकते हैं।
  • NRI परिवार: विदेश में रहने वाले परिवार ऑनलाइन माध्यम से पिंडदान करा सकते हैं — यह पूर्णतः शास्त्र-सम्मत है।

पिंडदान कब करना चाहिए — शुभ तिथियाँ

पिंडदान किसी भी समय कराया जा सकता है, परन्तु कुछ विशेष तिथियाँ अत्यन्त पुण्यदायी मानी जाती हैं:

  • पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष): भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक के 16 दिन। यह सर्वश्रेष्ठ समय है।
  • अमावस्या: प्रत्येक माह की अमावस्या पित्र तर्पण के लिए उत्तम मानी जाती है।
  • सोमवती अमावस्या: जो अमावस्या सोमवार को पड़ती है, वह विशेष पुण्यदायी होती है।
  • ग्रहण काल: सूर्य या चन्द्र ग्रहण के समय किया गया दान और श्राद्ध कई गुना फल देता है।
  • मृत्यु तिथि: जिस तिथि को पितर का निधन हुआ हो, उस तिथि को श्राद्ध करने से विशेष लाभ होता है।
  • गया में कभी भी: गया की भूमि स्वयं इतनी पवित्र है कि यहाँ किसी भी समय किया गया पिंडदान फलदायक होता है।

पित्र दोष क्या है — और पिंडदान से कैसे दूर होता है

जब किसी परिवार के पूर्वजों का विधिवत श्राद्ध, पिंडदान या तर्पण नहीं होता, तो उनकी आत्मा को शांति नहीं मिलती। वे भटकती रहती हैं और अपने वंशजों को कष्ट देती हैं। इसी को पित्र दोष कहते हैं। ज्योतिष शास्त्र में जन्म कुंडली में सूर्य, चन्द्र, राहु या केतु की विशेष स्थितियाँ पित्र दोष का संकेत देती हैं।

पित्र दोष के लक्षण

  • परिवार में बार-बार अकाल मृत्यु या दुर्घटनाएँ होना
  • संतान न होना या संतान को कष्ट होना
  • व्यापार और आर्थिक स्थिति में निरंतर गिरावट
  • घर में क्लेश और कलह का वातावरण
  • सपनों में पूर्वजों का बार-बार दिखना, विशेषकर उदास या भूखे रूप में
  • परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य निरंतर खराब रहना

पिंडदान से पित्र दोष का निवारण

गरुड़ पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि गया में पिंडदान करने से तीन पीढ़ी पहले तक के पितरों को मुक्ति मिलती है और उनके वंशजों पर से पित्र दोष का प्रभाव समाप्त हो जाता है। पिंडदान में काले तिल, जौ और कुशा का प्रयोग इसीलिए किया जाता है क्योंकि ये तीनों तत्व पितरों को विशेष रूप से प्रिय हैं और उनकी आत्मा को तृप्त करते हैं।

यदि आपके परिवार में उपरोक्त किसी भी प्रकार के कष्ट हैं, तो पिंडदान की विधि के बारे में विस्तार से जानें और हमसे परामर्श लें।

प्रयागराज में पिंडदान से तुलना

गया और प्रयागराज — दोनों पिंडदान के प्रमुख तीर्थ हैं। गया में विष्णु की कृपा से पिंडदान का फल मिलता है, जबकि प्रयागराज में त्रिवेणी संगम की पवित्रता पितरों को मुक्ति दिलाती है। जो लोग दोनों स्थानों पर पिंडदान करना चाहते हैं, वे हमारी प्रयागराज पिंडदान सेवा भी देख सकते हैं।

विस्तृत जानकारी के लिए हमारा लेख पढ़ें: पिंडदान कैसे करें — सम्पूर्ण विधि और महत्व

ऑनलाइन पिंडदान — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या ऑनलाइन पिंडदान शास्त्र-सम्मत है?

हाँ, ऑनलाइन पिंडदान पूर्णतः शास्त्र-सम्मत है। शास्त्रों में कहा गया है — “भावः प्रधानं सदा” — अर्थात भाव (श्रद्धा) सबसे महत्वपूर्ण है। जब आप वीडियो कॉल पर संकल्प लेते हैं और पंडित जी आपकी उपस्थिति में गया में विधिवत पिंडदान करते हैं, तो यह उतना ही फलदायक होता है जितना कि स्वयं वहाँ जाकर करना। कोरोना काल से लेकर अब तक हजारों परिवारों ने इस सेवा का लाभ उठाया है और संतोषजनक परिणाम पाए हैं।

2. वीडियो कॉल पर कौन सा ऐप उपयोग होता है?

हम Zoom और WhatsApp दोनों पर वीडियो कॉल की सुविधा देते हैं। जो भी आपके लिए सुविधाजनक हो, उस पर कॉल होती है। विदेश में रहने वाले परिवारों के लिए भी यह बिल्कुल आसान है — किसी विशेष ऐप की आवश्यकता नहीं, सामान्य WhatsApp पर भी काम हो जाता है।

3. पिंडदान के लिए कौन-कौन सी जानकारी देनी होगी?

बुकिंग के समय आपको निम्नलिखित जानकारी देनी होगी: (1) पितर का पूरा नाम, (2) पितर का गोत्र, (3) मृत्यु की तिथि (यदि याद हो), (4) आपका नाम और गोत्र, (5) आपके परिवार का स्थान। यदि गोत्र या तिथि न पता हो, तो भी पिंडदान संभव है — हमारे पंडित जी उचित विकल्प से काम करते हैं।

4. क्या एक साथ कई पीढ़ियों का पिंडदान हो सकता है?

हाँ, एक ही पूजा में तीन पीढ़ियों — माता-पिता, दादा-दादी और परदादा-परदादी — का पिंडदान किया जाता है। यदि आप अधिक पीढ़ियों का पिंडदान करना चाहते हैं, तो पंडित जी से परामर्श करें।

5. पिंडदान के बाद परिवार में क्या करना चाहिए?

पिंडदान के दिन परिवार में सात्विक भोजन करना चाहिए — प्याज, लहसुन, माँस, मदिरा का त्याग करें। यदि संभव हो तो उस दिन ब्राह्मण भोज या किसी निर्धन को भोजन कराएँ। पितरों का तर्पण करें और उनके नाम पर दान करें। इससे पिंडदान का फल और भी बढ़ जाता है।

6. बुकिंग कैसे करें और कितने दिन पहले करनी चाहिए?

बुकिंग के लिए हमसे WhatsApp या फोन पर संपर्क करें। हम कम से कम 2-3 दिन पहले बुकिंग करने की सलाह देते हैं ताकि उचित तिथि और समय निर्धारित किया जा सके। पितृपक्ष और अमावस्या के समय माँग अधिक होती है, इसलिए उस समय 7-10 दिन पहले बुकिंग करें।

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