Veda-Trained Pandits
Experienced pandits guide the ceremony with care for your family’s tradition.
शामिल नहीं:-
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30 family reviews22 for this pooja · 8 from across our services
बहुत ही अच्छी तरह से पिंडदान का कार्य संपन्न हुआ आज, यात्रा करने में असमर्थ लोगों के लिए बहुत ही अच्छा विकल्प दिया है आपने। महामारी के इस दौर में भी धर्मकार्य बाधित नहीं हुआ है। हम लोग बहुत ज्यादा संतुष्ट हैं । जय विष्णु
बहुत अच्छा काम हुआ। कोरोना में आना मुश्किल था। घर बैठे ऑनलाइन गया श्राद्ध हो गया। बहुत बहुत धन्यवाद। मन को शांति मिला।
Watching the pandit perform the rituals in real-time by the Falgu River, mentioning my father's name... it felt like we were truly there. Immense gratitude to the entire team.
Being in the USA, travelling to India just for Tarpan during Pitru Paksha was becoming very difficult. Prayag Pandits offered a well-coordinated solution.
I was skeptical about performing such a sacred ritual online from Canada. But honouring my parents in Kashi was important. They were very patient and answered all my questions.
Living in Singapore, we felt disconnected from these essential rituals. The live stream option for Tarpan at Prayagraj gave us a profound sense of connection and peace.
It was deeply important for us in Australia that the rituals were performed correctly. The ceremony reflected the authenticity we sought and was performed by a knowledgeable priest.
The Pind Daan at Kashi was handled carefully, with the pandit following every step diligently. Very reassuring.
Arranging Asthi Visarjan from Bhubaneswar seemed complex, but Prayag Pandits made it seamless. The pandit called us before the ceremony to explain every step. Very professional.
During Pitru Paksha, we booked Shradh at Prayagraj. The coordination was flawless - from date selection to the pandit assignment. Our family felt at peace after the ceremony.
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गया धाम — जहाँ पितरों को मुक्ति मिलती है। भारत के सभी तीर्थस्थलों में गया का स्थान अत्यन्त विशेष है। यहाँ पिंडदान करने से पितरों को सद्गति प्राप्त होती है और वंशजों को पित्र दोष से मुक्ति मिलती है। यदि आप गया स्वयं नहीं आ सकते, तो प्रयाग पंडित्स की ऑनलाइन पिंडदान सेवा के माध्यम से घर बैठे Zoom या WhatsApp वीडियो कॉल पर यह पवित्र कार्य संपन्न करा सकते हैं। हमारे अनुभवी पंडित जी फल्गु नदी के घाट पर स्वयं उपस्थित रहते हैं और सम्पूर्ण विधि-विधान से आपके पूर्वजों का पिंडदान करते हैं।
गरुड़ पुराण में स्पष्ट उल्लेख है — “गयायां पिण्डदानेन पितरः स्वर्गमाप्नुयुः।” अर्थात गया में पिंडदान करने से पितरों को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। वायु पुराण में भी गया को “पितृतीर्थ” कहा गया है — वह तीर्थ जो विशेष रूप से पितरों के उद्धार के लिए बनाया गया है।
गया में फल्गु नदी का विशेष महत्व है। रामायण की कथा के अनुसार, भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने भी यहाँ महाराज दशरथ का पिंडदान किया था। कहा जाता है कि माता सीता ने स्वयं फल्गु नदी के तट पर बालू से पिंड बनाकर महाराज दशरथ को पिंडदान दिया था। इसीलिए फल्गु नदी पर किया गया पिंडदान सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
महाभारत के वन पर्व में भी गया माहात्म्य का वर्णन है। भगवान धर्मराज युधिष्ठिर को ऋषि लोमश ने बताया था कि गया में एक बार पिंडदान करने से सात पीढ़ियों के पितरों को मुक्ति मिलती है। विष्णु पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति गया में पिंडदान करता है, उसके कुल में कोई भी व्यक्ति नरक की यातना नहीं भोगता।
गया में विष्णुपद मंदिर के पास स्थित फल्गु नदी का वह घाट जहाँ पिंडदान होता है, उसे “प्रेत शिला” और “रामशिला” क्षेत्र के निकट माना जाता है। यह भूमि भगवान विष्णु के चरण-चिह्न से पवित्र है, इसीलिए यहाँ का पिंडदान अन्य सभी तीर्थों से अधिक फलदायक है।
आधुनिक समय में अनेक परिवार विदेश में बसे हैं, कुछ स्वास्थ्य कारणों से यात्रा नहीं कर सकते, और कुछ के पास समय की कमी है। ऐसे सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रयाग पंडित्स ने ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था की है। यह सेवा पूर्णतः विधि-सम्मत है और इसमें किसी प्रकार की कमी नहीं की जाती।
₹21,000 की इस सेवा में सम्पूर्ण पूजन सामग्री और पंडित जी का पारिश्रमिक सम्मिलित है। आपको अलग से कुछ नहीं भेजना होता।
हिन्दू धर्मशास्त्र में पिंडदान का अधिकार निम्नलिखित व्यक्तियों को प्राप्त है:
पिंडदान किसी भी समय कराया जा सकता है, परन्तु कुछ विशेष तिथियाँ अत्यन्त पुण्यदायी मानी जाती हैं:
जब किसी परिवार के पूर्वजों का विधिवत श्राद्ध, पिंडदान या तर्पण नहीं होता, तो उनकी आत्मा को शांति नहीं मिलती। वे भटकती रहती हैं और अपने वंशजों को कष्ट देती हैं। इसी को पित्र दोष कहते हैं। ज्योतिष शास्त्र में जन्म कुंडली में सूर्य, चन्द्र, राहु या केतु की विशेष स्थितियाँ पित्र दोष का संकेत देती हैं।
गरुड़ पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि गया में पिंडदान करने से तीन पीढ़ी पहले तक के पितरों को मुक्ति मिलती है और उनके वंशजों पर से पित्र दोष का प्रभाव समाप्त हो जाता है। पिंडदान में काले तिल, जौ और कुशा का प्रयोग इसीलिए किया जाता है क्योंकि ये तीनों तत्व पितरों को विशेष रूप से प्रिय हैं और उनकी आत्मा को तृप्त करते हैं।
यदि आपके परिवार में उपरोक्त किसी भी प्रकार के कष्ट हैं, तो पिंडदान की विधि के बारे में विस्तार से जानें और हमसे परामर्श लें।
गया और प्रयागराज — दोनों पिंडदान के प्रमुख तीर्थ हैं। गया में विष्णु की कृपा से पिंडदान का फल मिलता है, जबकि प्रयागराज में त्रिवेणी संगम की पवित्रता पितरों को मुक्ति दिलाती है। जो लोग दोनों स्थानों पर पिंडदान करना चाहते हैं, वे हमारी प्रयागराज पिंडदान सेवा भी देख सकते हैं।
विस्तृत जानकारी के लिए हमारा लेख पढ़ें: पिंडदान कैसे करें — सम्पूर्ण विधि और महत्व।
हाँ, ऑनलाइन पिंडदान पूर्णतः शास्त्र-सम्मत है। शास्त्रों में कहा गया है — “भावः प्रधानं सदा” — अर्थात भाव (श्रद्धा) सबसे महत्वपूर्ण है। जब आप वीडियो कॉल पर संकल्प लेते हैं और पंडित जी आपकी उपस्थिति में गया में विधिवत पिंडदान करते हैं, तो यह उतना ही फलदायक होता है जितना कि स्वयं वहाँ जाकर करना। कोरोना काल से लेकर अब तक हजारों परिवारों ने इस सेवा का लाभ उठाया है और संतोषजनक परिणाम पाए हैं।
हम Zoom और WhatsApp दोनों पर वीडियो कॉल की सुविधा देते हैं। जो भी आपके लिए सुविधाजनक हो, उस पर कॉल होती है। विदेश में रहने वाले परिवारों के लिए भी यह बिल्कुल आसान है — किसी विशेष ऐप की आवश्यकता नहीं, सामान्य WhatsApp पर भी काम हो जाता है।
बुकिंग के समय आपको निम्नलिखित जानकारी देनी होगी: (1) पितर का पूरा नाम, (2) पितर का गोत्र, (3) मृत्यु की तिथि (यदि याद हो), (4) आपका नाम और गोत्र, (5) आपके परिवार का स्थान। यदि गोत्र या तिथि न पता हो, तो भी पिंडदान संभव है — हमारे पंडित जी उचित विकल्प से काम करते हैं।
हाँ, एक ही पूजा में तीन पीढ़ियों — माता-पिता, दादा-दादी और परदादा-परदादी — का पिंडदान किया जाता है। यदि आप अधिक पीढ़ियों का पिंडदान करना चाहते हैं, तो पंडित जी से परामर्श करें।
पिंडदान के दिन परिवार में सात्विक भोजन करना चाहिए — प्याज, लहसुन, माँस, मदिरा का त्याग करें। यदि संभव हो तो उस दिन ब्राह्मण भोज या किसी निर्धन को भोजन कराएँ। पितरों का तर्पण करें और उनके नाम पर दान करें। इससे पिंडदान का फल और भी बढ़ जाता है।
बुकिंग के लिए हमसे WhatsApp या फोन पर संपर्क करें। हम कम से कम 2-3 दिन पहले बुकिंग करने की सलाह देते हैं ताकि उचित तिथि और समय निर्धारित किया जा सके। पितृपक्ष और अमावस्या के समय माँग अधिक होती है, इसलिए उस समय 7-10 दिन पहले बुकिंग करें।