पूर्वजों का श्राद्ध न करने पर क्या होता है?
श्राद्ध करना एक पवित्र कर्तव्य है (पितृ ऋण — पूर्वजों के प्रति ऋण)। यदि कोई सक्षम होते हुए भी यह क्रिया न करे, तो पितरों की आत्मा को तृप्ति नहीं मिलती।
पारम्परिक मान्यता के अनुसार, असंतुष्ट पितर दो लोकों के बीच भटकते रहते हैं और अपने वंशजों के जीवन में विघ्न या बाधाएँ उत्पन्न कर सकते हैं, जिसे पितृ दोष कहते हैं। यह दोष स्वास्थ्य समस्याओं, आर्थिक कठिनाइयों, विवाह या संतान में विलम्ब, परिवार में अशान्ति, या बार-बार आने वाले नकारात्मक अनुभवों के रूप में प्रकट हो सकता है।
श्राद्ध करने से पितरों को शान्ति और गति मिलती है, जिससे उनकी आत्मा मुक्त होती है और वे बदले में अपने वंशजों को समृद्धि, स्वास्थ्य तथा कुशलता का आशीर्वाद देते हैं। यह पूर्वजों और उनके वंशजों — दोनों के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।
श्राद्ध कराना है?
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