क्या अष्टमी श्राद्ध और नवमी श्राद्ध लगातार दिनों पर किए जा सकते हैं?
हाँ, बिल्कुल। कई परिवार पितृ पक्ष में अलग-अलग पूर्वजों के लिए लगातार दिनों पर श्राद्ध करते हैं। October 3 का अष्टमी श्राद्ध और October 4 की मातृ नवमी (नवमी श्राद्ध) अलग-अलग पूर्वजों के लिए पूरी तरह स्वतंत्र विधियाँ हैं। यदि आपके पूर्वज इन दोनों तिथियों पर दिवंगत हुए हों, तो आप अपने पंडित के माध्यम से दोनों की व्यवस्था कर सकते हैं — एक ही स्थान पर या परिस्थिति के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर।
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श्राद्ध कराना है?
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