शय्या दान क्या है और इसका आध्यात्मिक महत्व क्या है?
शय्या दान बिस्तर या बिस्तर-सेट का दान है, जिसमें सामान्यतः गद्दा, तकिया, चादर और कंबल शामिल होते हैं। पुराणों में इसे परलोक में आराम देने और पूर्वजों की शांतिपूर्ण यात्रा के लिए विशेष रूप से शुभ बताया गया है। पद्म पुराण शय्या दान को पितृलोक में दिवंगत आत्माओं को विश्राम और सुविधा देने से स्पष्ट रूप से जोड़ता है। शास्त्रीय तर्क यह है कि जैसे दिवंगत व्यक्ति ने जीवनकाल में शय्या का उपयोग किया, वैसे ही किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद को शय्या अर्पित करना प्रतीकात्मक रूप से आत्मा को परलोक लोकों की यात्रा में आरामदायक विश्राम देता है। शय्या दान उन परिवारों के लिए विशेष रूप से अनुशंसित है जिनके प्रियजन की मृत्यु लंबे रोग या कष्ट के बाद हुई हो, क्योंकि इस दान से दिया गया आराम आत्मा की पीड़ादायक स्मृतियों को शांत करने वाला माना जाता है। माघ मेले में शय्या दान का विशेष पुण्य है, क्योंकि कल्पवासी — वे हजारों भक्त जो पूरे माघ मास संगम की रेत पर तंबुओं में रहकर तप करते हैं — ठंडी रातों में बिस्तर की अत्यंत आवश्यकता रखते हैं। कल्पवासियों को शय्या दान देना शास्त्रीय निर्देश (पूर्वजों का हित) को उन लोगों की व्यावहारिक सेवा से जोड़ता है जो आध्यात्मिक तपस्या कर रहे हैं।