पंचक क्या है और इसे अशुभ क्यों माना जाता है?
पंचक लगभग 2.5 दिनों की अवधि है, जब चन्द्रमा चंद्र-चक्र के अंतिम पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद और रेवती — से होकर गुजरता है। ये सभी कुम्भ और मीन राशि में आते हैं। हिन्दू ज्योतिष शास्त्र इस अवधि को पाँच विशिष्ट कार्यों के लिए अशुभ मानता है: दाह संस्कार (मृत्यु पंचक), निर्माण (अग्नि पंचक), दक्षिण दिशा की यात्रा (दक्षिण पंचक), बिस्तर या गद्दा खरीदना (रोग पंचक), और छप्पर बनाना (चोर पंचक)। इसका शास्त्रीय आधार मुहूर्त चिन्तामणि और धर्म सिन्धु में मिलता है, जो इन नक्षत्रों के दौरान सावधानी की सलाह देते हैं। यदि पंचक में मृत्यु हो, तो परिवार को पाँच कुशा पुतलों के साथ पंचक शान्ति पूजा करनी चाहिए, ताकि परिवार में आगे मृत्यु न हो — यह मान्यता गरुड़ पुराण की उस शिक्षा से जुड़ी है कि इन नक्षत्रों में प्रस्थान करने वाली आत्माएँ अन्य परिवार सदस्यों को भी खींच सकती हैं। पंचक अवधि लगभग हर 27 दिनों में आती है, जब चन्द्रमा सभी 27 नक्षत्रों का चक्र पूरा करता है।