हिन्दू पंचांग कैलेंडर प्रणाली कैसे काम करती है?
हिन्दू पंचांग एक चन्द्र-सौर कैलेंडर है, जो प्रतिदिन पाँच मुख्य अंगों को देखता है (पंच = पाँच, अंग = भाग): तिथि (चंद्र दिन — एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में), वार (सप्ताह का दिन — सात ग्रहों के नाम पर: रवि/सूर्य, सोम/चन्द्र, मंगल आदि), नक्षत्र (चंद्र मंडल — 27 नक्षत्र जिनसे होकर चन्द्रमा गुजरता है, प्रत्येक लगभग 13.33 degrees में फैला है), योग (सूर्य और चन्द्रमा का कोणीय संबंध — 27 योग जिनमें शुभ-अशुभ गुण मिलते हैं), और करण (आधी तिथि — 11 प्रकार, मुहूर्त को सूक्ष्म रूप से तय करने में उपयोग)। हिन्दू मास क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार अलग बिंदु से शुरू होते हैं: अमान्त प्रणाली (मास अमावस्या पर समाप्त होते हैं — गुजरात, महाराष्ट्र, दक्षिण भारत में प्रचलित) और पूर्णिमान्त प्रणाली (मास पूर्णिमा पर समाप्त होते हैं — उत्तर भारत, बिहार, UP में प्रचलित)। वर्ष सामान्यतः विक्रम संवत या शक संवत प्रणाली में चैत्र (March-April) से शुरू होता है। पितृपक्ष हमेशा आश्विन मास के कृष्ण पक्ष (September-October) में आता है। पंचांग विवाह, गृह प्रवेश, पिंड दान और श्राद्ध सहित सभी हिन्दू विधियों के शुभ समय (मुहूर्त) तय करने के लिए आवश्यक है।