क्या महिलाएँ और बेटियाँ अस्थि विसर्जन और श्राद्ध कर्म कर सकती हैं?
हाँ। यद्यपि परंपरागत व्यवहार में पुत्रों को मुख्य कर्ता माना गया, गरुड़ पुराण और बाद की स्मृतियों सहित शास्त्र पुत्र उपलब्ध न होने पर, या बेटी स्वयं अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहे तो, बेटियों, पत्नियों, बहुओं और अन्य महिला संबंधियों को वैध कर्ता मानते हैं। प्रयागराज, वाराणसी, हरिद्वार और गया के आधुनिक वैदिक पंडित बेटियों को पूर्ण अस्थि विसर्जन और श्राद्ध विधियों में नियमित रूप से मार्गदर्शन देते हैं। यदि सही गोत्र-आवाहन, संकल्प और संस्कृत मंत्र बोले जाएँ, तो कर्ता के लिंग से अलग विधि की आध्यात्मिक प्रभावशीलता समान रहती है। हम सभी प्रमुख तीर्थों पर बेटियों और महिलाओं को इन कर्मों में नियमित सहायता देते हैं।
अस्थि विसर्जन कराना है?
हमारे अनुभवी पंडित भारत के पवित्र स्थलों पर वीडियो प्रमाण के साथ प्रामाणिक अनुष्ठान कराते हैं।