महामृत्युंजय जप करने के क्या लाभ हैं?
महामृत्युंजय मंत्र, जो ऋग्वेद (मण्डल 7, सूक्त 59) में निहित है, “मृत्यु-विजयी” मंत्र कहलाता है। पूर्ण जप में 1.25 लाख (1,25,000) बार मंत्र का उच्चारण किया जाता है। माना जाता है कि इस जप से प्राण-घातक रोगों से दैवीय सुरक्षा मिलती है, शल्य-चिकित्सा या दुर्घटना के बाद शीघ्र स्वास्थ्य-लाभ होता है, काल सर्प दोष के नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं, और अकाल मृत्यु से रक्षा होती है। इसके साथ यह मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक स्थिरता और आत्मिक विकास भी प्रदान करता है। परिवार प्रायः गंभीर स्वास्थ्य-संकट या जीवन के बड़े परिवर्तन के समय भगवान शिव की उपचारक कृपा प्राप्त करने के लिए इस जप का आयोजन करते हैं।
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