तमिल हिन्दू परंपरा में अपर कर्म क्या है?
अपर कर्म (शाब्दिक अर्थ “दूसरा कर्म”) तमिल हिन्दू परंपरा में दिवंगत संबंधी के लिए किए जाने वाले सभी मृत्यु-पश्चात् अनुष्ठानों का सामूहिक नाम है, जो “अपर” अर्थात मृत्यु के बाद की 16-day श्रृंखला से अलग समझा जाता है। इन अनुष्ठानों में शामिल हैं: सदाकु समारोह (मृत्यु के दिन), संस्कारम (दाह संस्कार या दफन की तैयारी), दिन श्राद्धम (10-16 दिनों तक दैनिक कर्म), करुमाथि / शुभम (13th या 16th day का समारोह, जो प्रेत अवस्था में औपचारिक संक्रमण दर्शाता है), मासिकम (12 months तक मासिक अर्पण), और सपिण्डीकरण (पहली मृत्यु बरसी पर)। अपर कर्म तमिल वैदिक परंपरा के अनुसार विशिष्ट द्रविड़ मंत्रों के साथ होता है, जो उत्तर भारतीय पद्धति से भिन्न है। पूरी श्रृंखला 1 year तक चलती है और वाध्यार (तमिल पंडित) द्वारा कराई जाती है।