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General Hindu Knowledge

ब्रह्मरंध्र क्या है और इसका महत्व क्यों है?

उत्तर दिया Prakhar Porwal ·

ब्रह्मरंध्र का अर्थ है ब्रह्मा का छिद्र — खोपड़ी के ठीक शीर्ष पर स्थित विशिष्ट बिंदु, जो नवजात शिशु के fontanel से लगभग मेल खाता है, जिसके माध्यम से चेतना जन्म के समय शरीर में प्रवेश करती और मृत्यु के समय उससे बाहर जाती मानी जाती है। योग में सहस्रार जागरण का अर्थ है इस ब्रह्मरंध्र को सचेत रूप से खोलना — जिससे व्यक्तिगत चेतना सीमित शरीर-मन की पहचान से परे फैल सके। कई साधक ध्यान के दौरान सिर के शीर्ष पर ऊष्मा, दबाव, झुनझुनी या खुलने की अनुभूति जैसी शारीरिक संवेदनाएँ बताते हैं, जिन्हें ब्रह्मरंध्र सक्रियता के संकेत माने जाते हैं।

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