वाराणसी में मृत्यु का आध्यात्मिक महत्व क्या है?
स्कन्द पुराण के काशी खंड के अनुसार, भगवान शिव स्वयं काशी की पवित्र सीमा में मृत्यु पाने वाले व्यक्ति के कान में तारक मंत्र — मुक्ति का मंत्र — कहते हैं। इससे तत्काल मोक्ष (पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति) प्राप्त होता है, चाहे मृत्यु के समय व्यक्ति की आध्यात्मिक अवस्था कैसी भी हो। यही विश्वास वाराणसी में मुक्ति भवन और ऐसे अन्य संस्थानों के अस्तित्व को समझाता है, जहाँ वृद्ध और अंतिम अवस्था के रोगी अपने अंतिम दिन बिताने आते हैं। यही मणिकर्णिका की अनंत अग्नि और चौबीसों घंटे होने वाले दाह संस्कारों का कारण भी समझाता है — यहाँ मृत्यु भय का विषय नहीं, बल्कि मुक्ति में प्रवेश की तरह स्वागत योग्य मानी जाती है।
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