बनारसी साड़ी अन्य भारतीय रेशमी साड़ियों से कैसे अलग है?
बनारसी साड़ियाँ असली जरी (सोने और चाँदी की धातु-तंतु वाली डोरी) के उपयोग से अलग पहचानी जाती हैं, जिसे पारंपरिक Jacquard handloom तकनीकों से सीधे कपड़े में बुना जाता है; इनके विशिष्ट motifs मुगल दरबारी डिजाइन परंपराओं से आए हैं, और इनमें प्रयुक्त रेशम की गुणवत्ता भी प्रमुख होती है। वाराणसी की बुनाई विरासत, kadhua brocade तकनीक और असली जरी कार्य का विशेष संयोजन ऐसा वस्त्र बनाता है जो किसी अन्य भारतीय textile जैसा नहीं होता। Banarasi Silk की GI certification भी इस विशिष्टता को कानूनी मान्यता देती है।
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