उज्जैन अस्थि विसर्जन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उज्जैन सात मोक्ष क्षेत्रों में से एक है (अवन्तिका) — ऐसे पवित्र नगर जहाँ शास्त्र मुक्ति का आश्वासन देते हैं। पवित्र शिप्रा (क्षिप्रा) नदी उज्जैन से होकर बहती है और हिंदू धर्म की पवित्र नदियों में गिनी जाती है, इसलिए उसका जल पितृ विधियों के लिए स्वाभाविक रूप से पवित्रकारी माना जाता है।
अस्थि विसर्जन के लिए उज्जैन का महत्व भगवान महाकाल से उसके संबंध में निहित है — महाकाल, अर्थात काल और मृत्यु के स्वामी के रूप में शिव। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, जो भारत का एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, उज्जैन की अधिष्ठाता उपस्थिति है। महाकाल की छाया में पितृ विधियां करने से दिवंगत आत्मा को कालचक्र से सीधी मुक्ति मिलने की मान्यता है।
इसके अतिरिक्त, शिप्रा तट पर स्थित सिद्धवट भारत के तीन पवित्र अमर वृक्षों में से एक है (प्रयागराज के अक्षयवट और वृंदावन के वंशीवट के साथ)। मान्यता है कि भगवान राम ने सिद्धवट में राजा दशरथ के लिए पितृ तर्पण किया था, इसलिए यह पितृ अर्पणों के लिए शास्त्रसम्मत स्थल माना जाता है।
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