गया में पिंड दान के शास्त्रों में बताए गए लाभ क्या हैं?
वायु पुराण और संबंधित ग्रंथ ये विशिष्ट लाभ बताते हैं: (1) सप्त पितृ की मुक्ति — पितृ पक्ष की सात पीढ़ियाँ (पिता, पितामह, प्रपितामह आदि) और उतनी ही मातृ पक्ष की पीढ़ियाँ, (2) पितृ दोष से मुक्ति — असंतुष्ट पूर्वजों से उत्पन्न ज्योतिषीय दोष, (3) प्रेत या पिशाच योनि में फँसे पूर्वजों के लिए मोक्ष, (4) कर्ता के अपने परिवार के लिए संतान और समृद्धि का आशीर्वाद, (5) हजार सामान्य श्राद्धों के बराबर आध्यात्मिक पुण्य, (6) “ऋण त्रय” का निवारण — वे तीन पैतृक ऋण जिनके साथ हर हिंदू जन्म लेता है, (7) जिन वंशजों से पूर्व श्राद्ध छूट गए हों उनके लिए प्रायश्चित्त, (8) भविष्य जन्मों में कर्ता के लिए मोक्ष का मार्ग खुलना। ये लाभ गया के लिए विशिष्ट हैं और अन्य तीर्थों में इसी स्तर पर उपलब्ध नहीं माने जाते।
पिंड दान कराना है?
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