प्रयागवाल या पंडा कौन हैं और उनके अभिलेख (वही) क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
प्रयागवाल, जिन्हें पंडा भी कहा जाता है, प्रयागराज के पारंपरिक पुरोहित हैं। उनके परिवार त्रिवेणी संगम और संबंधित तीर्थों पर यजमानों का मार्गदर्शन तथा अनुष्ठान कराते आए हैं।
कुछ प्रयागवाल परिवार वही या पोथी नाम से वंशावली और तीर्थयात्रा के अभिलेख रखते हैं। इनमें यजमानों के नाम, गोत्र, मूल स्थान, पारिवारिक संबंध तथा किए गए अनुष्ठानों की तिथियाँ और विवरण मिल सकते हैं। उपलब्धता और पूर्णता अलग-अलग अभिलेखों में भिन्न होती है।
अपने परिवार की पुरानी प्रविष्टि मिलने पर पारिवारिक इतिहास और परंपरागत पुरोहित-संबंध समझने में सहायता मिल सकती है। किसी प्रविष्टि का होना अपने-आप प्रत्येक ऐतिहासिक दावे या पुरोहित की योग्यता का प्रमाण नहीं है। Prayag Pandits वर्तमान में पुराने अभिलेख, वंशावली या वंश-वृक्ष खोजने की सेवा नहीं देता।
श्राद्ध कराना है?
हमारे अनुभवी पंडित भारत के पवित्र स्थलों पर प्रामाणिक अनुष्ठान कराते हैं।