सभी हिंदू गया को सर्वोच्च पितृ तीर्थ क्यों मानते हैं?
गया का सर्वोच्च पितृ तीर्थ होना शास्त्रीय प्रमाण और आध्यात्मिक इतिहास के संयोजन पर आधारित है: (1) शास्त्रीय समर्थन — वायु पुराण ने गया माहात्म्य को पूरे अध्याय दिए हैं, अग्नि पुराण गया को पहली पसंद बताता है, और महाभारत युधिष्ठिर की गया यात्रा दर्ज करता है, (2) दिव्य उपस्थिति — विष्णु गदाधर रूप में प्रत्यक्ष माने जाते हैं और प्रसिद्ध विष्णुपद चरणचिह्न छोड़ते हैं, (3) गयासुर कथा — वह असुर जिसका शरीर स्वयं गया की पवित्र भूमि बना, जिसे विष्णु, ब्रह्मा और शिव ने पवित्र किया, (4) सप्त पितृ प्रतिज्ञा — एक ही अनुष्ठान से सात पीढ़ियों की शास्त्रीय रूप से सुनिश्चित मुक्ति, (5) अखंड परंपरा — 2,500 वर्षों से अधिक समय से लाखों हिंदू परिवार गया में पिंड दान करते आए हैं, जिससे आध्यात्मिक पुण्य की अविच्छिन्न श्रृंखला बनी है। भारत का कोई अन्य तीर्थ यह संयोजन नहीं रखता।
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