गया में पिंड दान का गहरा आध्यात्मिक महत्व क्या है?
गया में पिंड दान को हिंदू धर्म में पूर्वजों की मुक्ति का सबसे शक्तिशाली अनुष्ठान माना गया है। इसका गहरा आध्यात्मिक महत्व वायु पुराण और अग्नि पुराण से आता है, जिनमें कहा गया है कि पृथ्वी पर गया ही वह स्थान है जहाँ भगवान विष्णु दिवंगत आत्माओं के लिए अर्पण स्वयं स्वीकार करते हैं — प्रसिद्ध विष्णुपद चरणचिह्न के माध्यम से। भागवत पुराण वर्णन करता है कि भगवान राम ने अपने पिता राजा दशरथ के लिए गया में पिंड दान किया था। महाभारत में कुरुक्षेत्र युद्ध में मारे गए अपने संबंधियों के लिए युधिष्ठिर द्वारा गया पिंड दान करने का उल्लेख है। इससे गया एक अद्वितीय पितृ तीर्थ के रूप में स्थापित होता है, जहाँ पूर्वजों का कर्म रूपांतरित हो सकता है — और पीढ़ियों से प्रेत अवस्था में अटकी आत्माएँ भी वंशज द्वारा किए गए एक पिंड दान संस्कार से मुक्ति पा सकती हैं।
पिंड दान कराना है?
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