महाभारत के तर्पण और आधुनिक पितृपक्ष पद्धति का क्या संबंध है?
महाभारत ने तर्पण — तिल मिले जल का अर्पण — को पितरों के लिए सबसे सरल और सार्वभौमिक रूप से सुलभ अर्पण के रूप में स्थापित किया। भीष्म के अनुशासन पर्व के उपदेश बताते हैं कि जब विस्तृत पिंड दान संभव न हो, तब तर्पण पर्याप्त है। आधुनिक पितृपक्ष पद्धति इसी क्रमिक दृष्टि का पालन करती है: सोलह दिनों तक दैनिक तर्पण, पूर्वज की मृत्यु तिथि पर पूर्ण पिंड दान, और सर्व पितृ अमावस्या पर समग्र अंतिम अर्पण।
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पिंड दान कराना है?
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