गया पिंड दान तीर्थ कैसे बना — पौराणिक पृष्ठभूमि
गया माहात्म्य और पद्म पुराण के अनुसार, गया का नाम गयासुर पर रखा गया है — एक शक्तिशाली असुर जिसने इतनी कठोर तपस्या की कि उसे यह वरदान मिला: उसके शरीर को छूने वाले को मोक्ष प्राप्त होगा। देवताओं के लिए मुक्त आत्माओं का यह प्रवाह संभालना कठिन हो गया, इसलिए उन्होंने भगवान विष्णु से हस्तक्षेप का अनुरोध किया। भगवान विष्णु ने एक दिव्य कार्य में अपने चरण-कमल से गयासुर को पृथ्वी में दबा दिया — यही पवित्र चिह्न आज विष्णुपद मंदिर में पूजा जाता है। गयासुर ने प्रार्थना की कि गया ऐसा स्थान बने जहाँ लोग अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए पिंड दान कर सकें। भगवान विष्णु ने यह वरदान दिया और इस प्रकार गया सबसे पवित्र पितृ क्षेत्र के रूप में स्थापित हो गया।
पिंड दान कराना है?
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