ब्रह्मकपाल में पिंड दान की विधि क्या है?
शुद्धिकारक स्नान (प्रायः तप्त कुंड या अलकनंदा में) के पश्चात् कर्ता, सामान्यतः श्वेत धोती पहने, ब्रह्मकपाल घाट पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठते हैं। पंडित जी के मार्गदर्शन में वे संकल्प लेते हैं। पिंड (चावल के गोले, सामान्यतः 7) तैयार किए जाते हैं और पूर्वजों के नाम तथा वंश का उच्चारण करते हुए विशिष्ट मंत्रों के साथ उन्हें अर्पित किए जाते हैं। तर्पण (जल-अर्पण) भी सामान्यतः किया जाता है। अंत में, पंडित जी के निर्देशानुसार पिंड अलकनंदा नदी में प्रवाहित किए जाते हैं अथवा निर्धारित स्थान पर रखे जाते हैं।
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पिंड दान कराना है?
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