ब्रह्मकपाल में पिंड दान के बाद पितरों की क्या गति होती है?
पौराणिक संदर्भों और स्थल-परंपरा के अनुसार मूल मान्यता यह है कि ब्रह्मकपाल में सच्ची श्रद्धा के साथ पिंड दान करने से पितरों को पूर्ण और अंतिम मुक्ति (मोक्ष) प्राप्त होती है। ऐसा माना जाता है कि वे पूरी तरह तृप्त हो जाते हैं, जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाते हैं और सर्वोच्च स्वर्गीय धाम को प्राप्त होते हैं। इसीलिए प्रायः कहा जाता है कि ब्रह्मकपाल में पिंड दान करने के बाद वंशज उन पितरों के लिए आगे के वार्षिक श्राद्ध कर्म के दायित्व से मुक्त हो जाते हैं।
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पिंड दान कराना है?
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