भारत में पिंड दान के लिए गया को सर्वोत्तम स्थान क्यों माना जाता है?
गया का पिंड दान के लिए सर्वोच्च स्थान वायु पुराण, अग्नि पुराण, विष्णु पुराण और महाभारत में स्थापित है — ये सभी गया को अद्वितीय पितृ तीर्थ बताते हैं, जहाँ स्वयं भगवान विष्णु गदाधर रूप में उपस्थित होकर पितरों को अर्पित पिंडों को सीधे स्वीकार करते हैं। गयासुर की कथा — वह असुर जिसने भगवान विष्णु को अपने शरीर पर चरण रखने दिया (जिससे प्रसिद्ध विष्णुपद चरण-चिह्न बने) — इस भूमि को स्थायी पवित्रता देती है। शास्त्र वचन देते हैं कि गया में किया गया एक पिंड दान सात पीढ़ियों के पितरों (सप्त पितृ) को जन्म-मरण के चक्र से मुक्त करता है। भारत का कोई अन्य तीर्थ विशेष रूप से पितृ-मुक्ति के लिए ऐसा ही शास्त्रीय समर्थन नहीं रखता।
पिंड दान कराना है?
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