वेदों के अनुसार पिंड दान के लिए पितृपक्ष सबसे महत्वपूर्ण समय क्यों है?
शतपथ ब्राह्मण स्थापित करता है कि घटते चंद्रमा की अवधि (कृष्ण पक्ष) पितृ अर्पणों के लिए सबसे अनुकूल है, क्योंकि माना जाता है कि इस अवधि में पूर्वज पृथ्वी लोक के अधिक निकट होते हैं। पितृपक्ष के सोलह दिन (भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में पड़ते हैं) इसी वैदिक सिद्धांत का सीधा विस्तार हैं। पितृपक्ष के अंत की अमावस्या (new moon) पिंड दान के लिए सबसे शक्तिशाली एकल दिन मानी जाती है, क्योंकि जीवितों और पितृ लोक के बीच का आवरण चंद्रमा के अंधकार में सबसे पतला माना जाता है।
क्या यह उपयोगी था?
व्हाट्सऐप पर अगला प्रश्न पूछें
पिंड दान कराना है?
हमारे अनुभवी पंडित भारत के पवित्र स्थलों पर वीडियो प्रमाण के साथ प्रामाणिक अनुष्ठान कराते हैं।