मुख्य बिंदु
इस लेख में
जब कोई प्रिय जन इस संसार से विदा लेता है, तो उनकी अंतिम यात्रा दाह-संस्कार के साथ समाप्त नहीं होती। प्रयागराज में अस्थि विसर्जन — पवित्र जल में मृत अवशेषों का विसर्जन — हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण मृत्यु-पश्चात अनुष्ठानों में से एक है। यह वह कर्म है जिसके द्वारा एक शोकाकुल परिवार अपने दिवंगत की आत्मा के प्रति अपना अंतिम कर्तव्य निभाता है — उसे इस सांसारिक अस्तित्व के बंधनों से मुक्त कर मोक्ष की ओर अग्रसर करता है। ओड़िया भाषी परिवार हमारी ओड़िशा तीर्थयात्रियों के लिए विशेष अस्थि विसर्जन सेवा त्रिवेणी संगम पर बुक कर सकते हैं।
प्रयागराज — प्राचीन तीर्थराज (तीर्थों का राजा) — अस्थि विसर्जन के लिए अतुलनीय पवित्रता रखता है। त्रिवेणी संगम पर — जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का मिलन होता है — जल में असाधारण शुद्धिकारक और मुक्तिदायक शक्ति मानी जाती है। हमारे शास्त्र घोषित करते हैं: “प्रयागे संगमे स्नानम् मुक्तिदायकम्” — प्रयाग संगम में स्नान मोक्ष प्रदान करता है। यदि एक स्नान मुक्ति दे सकता है, तो इन जलों में मृत अवशेषों का विसर्जन उन सर्वाधिक शुभ कार्यों में से एक माना जाता है जो कोई परिवार दिवंगत आत्मा के लिए कर सकता है।
यह मार्गदर्शिका वह सब कुछ बताती है जो आपको जानना चाहिए: शास्त्रीय महत्व, चरण-दर-चरण प्रक्रिया, अस्थि विसर्जन का समय और शुभ मुहूर्त, पैकेज और मूल्य, और प्रयाग पंडित्स के साथ बुकिंग कैसे करें — ताकि समारोह पूर्ण भक्ति और शास्त्रीय यथार्थता के साथ संपन्न हो।
प्रयागराज अस्थि विसर्जन का सर्वोत्तम समय — शास्त्रीय आधार
अस्थि विसर्जन का समय शास्त्रों में सुनिश्चित किया गया है। धर्मसिंधु और वामन पुराण के अनुसार, मृत्यु के तीसरे दिन अस्थियाँ एकत्र की जानी चाहिए (“अस्थि सञ्चयनं तु मृत्युदिनात् तृतीये”)। नारद पुराण उत्तरभाग अध्याय 43 के अनुसार, दसवें दिन (दशाह) से पहले गंगा में विसर्जन संपन्न हो जाना चाहिए — इससे दिवंगत आत्मा को गंगा तट पर मरने का पूर्ण पुण्य प्राप्त होता है। यदि परिस्थितियाँ इसे रोकती हों, तो अवशेषों को मिट्टी के स्वच्छ पात्र में सुरक्षित रखा जा सकता है। प्रयागराज में वर्ष के किसी भी समय अस्थि विसर्जन शास्त्रीय रूप से उचित है, किंतु कुछ विशेष तिथियाँ और काल खंड असाधारण रूप से शुभ माने जाते हैं।
अस्थि विसर्जन कब करें — सर्वाधिक शुभ तिथियाँ और काल खंड
निम्नलिखित तिथियाँ और काल खंड अस्थि विसर्जन के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं। परिवार इनमें से किसी एक का चुनाव करके अधिकतम पुण्य की प्राप्ति कर सकता है:
- पितृपक्ष (महालया पक्ष): आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में मनाया जाने वाला पितृपक्ष (सितंबर–अक्टूबर) सभी पितृ कर्मों के लिए सर्वाधिक पवित्र काल है। महालया अमावस्या — पितृपक्ष का अंतिम दिन — में प्रयागराज में अस्थि विसर्जन करना सर्वोच्च पुण्यदायी माना जाता है। इस काल में हजारों परिवार विशेष रूप से प्रयागराज आते हैं।
- कार्तिक पूर्णिमा: कार्तिक माह की पूर्णिमा (अक्टूबर–नवंबर) में गंगा स्नान और पितृ कर्म का विशेष महत्व है। इस दिन त्रिवेणी संगम पर दीपदान के साथ अस्थि विसर्जन करना परिवार और दिवंगत दोनों को विशेष आशीर्वाद देता है।
- मकर संक्रांति: माघ माह में मकर संक्रांति (14–15 जनवरी) पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इस दिन गंगा स्नान और पितृ तर्पण को शास्त्रों में सर्वोच्च स्थान दिया गया है। माघ मेले के दौरान प्रयागराज में अस्थि विसर्जन करना अत्यंत शुभ है।
- अमावस्या (विशेषतः सोमवती और मौनी अमावस्या): प्रत्येक अमावस्या पितृ कर्मों के लिए उचित है, किंतु जो अमावस्या सोमवार को पड़े (सोमवती अमावस्या) और माघ माह की मौनी अमावस्या विशेष रूप से शक्तिशाली मानी जाती हैं। इन तिथियों पर संगम में अस्थि विसर्जन का पुण्य अनंत गुना बढ़ जाता है।
- अक्षय तृतीया: वैशाख शुक्ल तृतीया (अप्रैल–मई) को किया गया कोई भी पुण्य कर्म “अक्षय” — अविनाशी और स्थायी — माना जाता है। यह हिंदू पंचांग के तीन सर्वाधिक शुभ दिनों में से एक है। इस दिन प्रयागराज में अस्थि विसर्जन अधिकतम पुण्य प्रदान करता है।
- कुंभ और माघ मेला काल: कुंभ मेले (12 वर्ष में एक बार) और माघ मेले के दौरान करोड़ों श्रद्धालु संगम पर स्नान और पितृ कर्म के लिए आते हैं। इस काल में संगम की सामूहिक पवित्र उपस्थिति और ऊर्जा अतुलनीय होती है, और परंपरागत रूप से इस अवधि में किया गया अस्थि विसर्जन अत्यंत शुभ माना जाता है। भीड़ और मूल्य दोनों बढ़ते हैं — कम से कम 2-3 महीने पूर्व बुकिंग आवश्यक है।
- गंगा दशमी: ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा हिमालय से अवतरित हुई थीं। यह दिन गंगा संबंधित सभी अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ है।
- पूर्णिमा और एकादशी: सामान्य रूप से प्रत्येक पूर्णिमा, एकादशी और द्वादशी पर अस्थि विसर्जन करना उचित माना जाता है। चतुर्थी और नवमी पर जहाँ तक संभव हो इसे आरंभ न करें।
अस्थि विसर्जन क्या है — अनुष्ठान की व्याख्या
अस्थि (संस्कृत: अस्थि) का अर्थ है हड्डियाँ, और विस्तृत अर्थ में यह दाह-संस्कार के बाद शेष बचे आंशिक रूप से जले हुए अवशेषों — हड्डियों और राख — को संदर्भित करता है। विसर्जन का अर्थ है विसर्जित करना या मुक्त करना। इस प्रकार अस्थि विसर्जन पवित्र जल में इन अवशेषों का विधिपूर्वक विसर्जन है, जो दिवंगत आत्मा के अंत्येष्टि संस्कार (अन्त्येष्टि संस्कार) को पूर्ण करता है।
धर्मसिंधु, वामन पुराण, और नारद पुराण उत्तरभाग (अध्याय 43) अस्थि विसर्जन के समय और प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले प्राथमिक शास्त्रीय प्रमाण हैं। गरुड़ पुराण प्रेत कांड (अध्याय 5 व 34) अस्थि संचयन (हड्डी संग्रह) की विधि को निर्धारित करता है। इन ग्रंथों के अनुसार:
- अवशेष (फूल, जैसा उत्तर भारत में प्रचलित है) दाह-संस्कार के तीसरे दिन एकत्र किए जाने चाहिए।
- नारद पुराण उत्तरभाग (अध्याय 43) के अनुसार दसवें दिन (दशाह) से पहले गंगा में विसर्जन संपन्न होना चाहिए — इस नियम का पालन करने वाले परिवार को गंगा तट पर मरने का पुण्य मिलता है।
- यदि दसवें दिन से पहले विसर्जन संभव न हो, तो परिवार की परंपरागत प्रथा के अनुसार बाद में जाकर तीर्थ पर विसर्जन करना उचित है।
- अवशेषों को उन NRI परिवारों के लिए स्वच्छ मिट्टी के पात्र में सुरक्षित रखा जा सकता है जो तुरंत यात्रा नहीं कर सकते।
प्रयागराज अस्थि विसर्जन की चरण-दर-चरण प्रक्रिया
जब आप प्रयाग पंडित्स के साथ बुकिंग करते हैं, तो हमारे अनुभवी पंडित जी शास्त्रीय विधि के अनुसार पूरे समारोह का प्रबंधन करते हैं। यहाँ पूरी प्रक्रिया विस्तार से दी गई है:
- आगमन और समन्वय: बुकिंग के बाद, पंडित जी 2 घंटे के भीतर आपसे संपर्क करके आपकी आगमन तिथि, समय, और दिवंगत का नाम एवं गोत्र की पुष्टि करते हैं। वे सभी पूजा सामग्री पहले से व्यवस्थित करते हैं।
- घाट पर पहुँचना: पंडित जी संगम घाट या दशाश्वमेध घाट (प्रीमियम पैकेज में नाव के साथ) पर आपसे मिलते हैं। स्टेशन/हवाई अड्डे से पिकअप के लिए हमारे पैकेज में परिवहन की सुविधा है।
- प्रारंभिक संकल्प: परिवार के सदस्य (आदर्श रूप से पुत्र या सबसे बड़े पुरुष सदस्य) संकल्प करते हैं — अनुष्ठान के उद्देश्य की औपचारिक घोषणा — दिवंगत का नाम, उनके साथ संबंध और अनुष्ठान का उद्देश्य बताते हुए। पंडित जी के मार्गदर्शन में यह संस्कृत में किया जाता है।
- पवित्रीकरण (पावित्रेकरण): परिवार के सदस्य अनुष्ठान ग्रंथों में निर्धारित आचमन (जल का अनुष्ठानिक सेवन) और देह विशुद्धि करते हैं।
- घाट पर पिंड दान: चावल के आटे के छोटे गोले (पिंड) जिनमें तिल, शहद और घी मिला होता है, उचित मंत्रों के साथ दिवंगत आत्मा को अर्पित किए जाते हैं। ये उस शारीरिक रूप का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसमें आत्मा निवास करती थी।
- संगम तक नाव यात्रा (प्रीमियम पैकेज): परिवार निजी नाव पर सवार होकर उस वास्तविक संगम बिंदु की ओर प्रस्थान करता है जहाँ तीनों नदियाँ मिलती हैं। इसमें लगभग 10–15 मिनट लगते हैं।
- अस्थि विसर्जन — विसर्जन का क्षण: मृत अवशेषों को फूलों और पवित्र अर्पणों के साथ नारद पुराण उत्तरभाग (अध्याय 43) और पद्म पुराण में निर्धारित उचित मंत्रों के उच्चारण के साथ संगम जल में विसर्जित किया जाता है। विसर्जन धीरे-धीरे और श्रद्धापूर्वक किया जाता है।
- तर्पण (जल अर्पण): परिवार के सदस्य दिवंगत आत्मा को जल (तिल और कुश घास मिलाकर) अर्पित करते हैं, आत्मा का नाम और गोत्र दोहराते हुए, उसे पोषण और आशीर्वाद स्वीकार करने के लिए आमंत्रित करते हैं।
- अंतिम प्रार्थना और आरती: समारोह गंगा आरती और आत्मा की मुक्ति तथा शांतिपूर्ण आगे की यात्रा के लिए अंतिम प्रार्थना के साथ समाप्त होता है।
- फोटो और वीडियो: प्रयाग पंडित्स पूरे समारोह की फोटो और वीडियो प्रदान करता है, जो उन परिवार के सदस्यों को भेजा जाता है जो व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके।
प्रयागराज में अस्थि विसर्जन क्यों करें — तीर्थराज का महत्व
भारत के सभी पवित्र नदियों और तीर्थ स्थलों में, प्रयागराज पितृ कर्मों के लिए सर्वोच्च स्थान रखता है। मत्स्य पुराण प्रयाग को तीर्थराज — सभी तीर्थ स्थलों का स्वामी — घोषित करता है। इस पुराण में वर्णित एक तुला कथा में प्रयाग तीर्थ को ब्रह्मांडीय तराजू पर सभी अन्य तीर्थों से भारी सिद्ध किया गया है। चार कारण इसे अस्थि विसर्जन के लिए विशेष रूप से शक्तिशाली बनाते हैं:
- त्रिवेणी संगम — त्रिगुण पवित्र संगम: तीन नदियों का मिलन — गंगा (हिमालय से), यमुना (यमुनोत्री से) और भूमिगत सरस्वती — एक आध्यात्मिक रूप से आवेशित भँवर बनाता है। प्रत्येक नदी में विशिष्ट दैवीय ऊर्जा है। उनका संगम शुद्धिकारक शक्ति को अनंत गुना बढ़ाता है।
- प्रजापति का यज्ञ भूमि: हिंदू परंपरा के अनुसार, प्रयागराज वह स्थान है जहाँ भगवान ब्रह्मा (प्रजापति) ने सृष्टि के प्रारंभ में दश अश्वमेध यज्ञ किए थे — इसीलिए इस स्थान का नाम “प्रयाग” पड़ा (यज्ञ करने का स्थल)। यह भूमि स्वयं आदिम पवित्र ऊर्जा से संतृप्त है।
- कल्पतरु और अक्षयवट: प्रयागराज किले के भीतर अमर बरगद का पेड़, अक्षयवट, पुराणों में उल्लिखित है — यह उन लोगों को मुक्ति प्रदान करता है जो इसके निकट पितृ कर्म करते हैं।
- गंगा का उत्तरवाहिनी प्रवाह: संगम पर, गंगा दक्षिण की ओर जाने से पहले थोड़े समय के लिए उत्तर की ओर (उत्तरवाहिनी) बहती है। गंगा का यह दुर्लभ उत्तरवाहिनी प्रवाह जीवित और पितृ दोनों की उपासना के लिए विशेष रूप से पावन और शक्तिशाली माना जाता है।
प्रयागराज में अस्थि विसर्जन — पूर्ण पैकेज और मूल्य
प्रयाग पंडित्स प्रत्येक परिवार की आवश्यकताओं और परिस्थितियों के अनुसार व्यापक पैकेज प्रदान करता है — सरल घाट समारोह से लेकर आवास, परिवहन और उन परिवारों के लिए ऑनलाइन विकल्प तक जो प्रयागराज नहीं आ सकते।
| पैकेज | मूल्य | क्या सम्मिलित है |
|---|---|---|
| बेसिक अस्थि विसर्जन (नाव के बिना) | ₹3,100 | घाट-किनारे समारोह, सभी पूजा सामग्री, पंडित जी, फोटो |
| प्रीमियम अस्थि विसर्जन (निजी नाव के साथ) | ₹5,100 | संगम तक निजी नाव, पूर्ण अनुष्ठान, पूजा सामग्री, फोटो और वीडियो |
| ओड़िया परिवार विशेष (नाव के साथ) | ₹5,100 | ओड़िया भाषी पंडित, निजी नाव, ओड़िया परंपरा में पूर्ण अनुष्ठान |
| ऑनलाइन अस्थि विसर्जन (NRI / दूरस्थ) | ₹9,999 | अस्थियाँ हमें कोरियर करें, आपकी ओर से पूर्ण अनुष्ठान, लाइव वीडियो कॉल, फोटो और वीडियो |
| सिल्वर सेवा (ठहरना + अनुष्ठान + ट्रांसफर) | ₹14,999 | अनुष्ठान + 1 रात आवास + हवाई अड्डा/स्टेशन ट्रांसफर |
| प्रयागराज पैकेज 2D/1N | ₹13,500 | 2-दिवसीय यात्रा, अनुष्ठान, आवास, स्थानीय दर्शनीय स्थल |
| गोल्ड सेवा (ठहरना + अनुष्ठान + ट्रांसफर) | ₹17,999 | उन्नत आवास, अनुष्ठान, हवाई अड्डा/स्टेशन ट्रांसफर, भोजन |
| प्लेटिनम सेवा (पूर्ण सेवा 1N/2D) | ₹20,999 | प्रीमियम ठहरने, सभी भोजन, पूर्ण अनुष्ठान, निजी कार, व्यक्तिगत पंडित एस्कॉर्ट |
🙏 प्रयागराज में अस्थि विसर्जन बुक करें
NRI परिवारों के लिए ऑनलाइन अस्थि विसर्जन
दूरी इस पवित्र कर्तव्य को पूरा करने में बाधा नहीं बनने देनी चाहिए। प्रयाग पंडित्स ने संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, सिंगापुर और खाड़ी देशों के सैकड़ों NRI परिवारों को भारत आए बिना प्रयागराज में अस्थि विसर्जन करने में सहायता की है।
ऑनलाइन अस्थि विसर्जन की प्रक्रिया सरल है:
- ₹9,999 पर ऑनलाइन अस्थि विसर्जन पैकेज बुक करें।
- मृत अवशेषों को हमारे पंजीकृत प्रयागराज पते पर कोरियर करें। हम अंतर्राष्ट्रीय शिपमेंट के लिए सीमा शुल्क और कोरियर प्रक्रिया में मार्गदर्शन करते हैं।
- संकल्प के लिए पंडित जी के साथ वीडियो कॉल शेड्यूल करें — आप दुनिया में कहीं से भी अनुष्ठान घोषणा में भाग लेते हैं।
- नियत दिन पर लाइव वीडियो के माध्यम से समारोह में उपस्थित रहें। पंडित जी त्रिवेणी संगम पर पूर्ण अनुष्ठान करते हैं और आपको रियल टाइम में स्ट्रीम करते हैं।
- परिवार के रिकॉर्ड और मानसिक शांति के लिए समारोह का पूर्ण फोटो और वीडियो रिकॉर्ड प्राप्त करें।
NRI परिवारों के लिए, हमारी व्यापक अस्थि विसर्जन मार्गदर्शिका आज उपलब्ध सबसे व्यावहारिक चिंताओं और विकल्पों को भी संबोधित करती है।
अस्थि विसर्जन मुहूर्त 2026 — प्रयागराज के लिए विशेष तिथियाँ
वर्ष 2026 में प्रयागराज में अस्थि विसर्जन का मुहूर्त निर्धारित करने के लिए निम्नलिखित प्रमुख तिथियाँ विशेष रूप से शुभ हैं। इन तिथियों पर पूर्व बुकिंग अनिवार्य है क्योंकि संगम घाट पर अत्यधिक भीड़ होती है:
- मकर संक्रांति 2026 (14 जनवरी): सूर्य के मकर राशि प्रवेश का दिन — पितृ तर्पण के लिए अत्यंत शुभ।
- माघी पूर्णिमा 2026 (12 फरवरी): माघ मेले का सबसे पावन दिन, संगम स्नान और पितृ कर्म के लिए विशेष।
- फाल्गुन अमावस्या 2026 (मार्च): पितृ तर्पण के लिए उत्तम।
- अक्षय तृतीया 2026 (29 अप्रैल): वैशाख शुक्ल तृतीया — इस दिन का पुण्य कभी नष्ट नहीं होता।
- ज्येष्ठ अमावस्या / शनि जयंती 2026 (मई): पितृपक्ष कर्म और शनि की शांति दोनों के लिए।
- आषाढ़ पूर्णिमा / गुरु पूर्णिमा 2026 (जुलाई): पितृ कर्म के साथ गुरु आशीर्वाद।
- श्राद्ध पक्ष (पितृपक्ष) 2026 (सितंबर): 16 दिवसीय पितृ पक्ष — अस्थि विसर्जन के लिए सर्वोत्तम काल। प्रतिदिन विशेष मुहूर्त उपलब्ध।
- महालया अमावस्या 2026 (सितंबर): पितृपक्ष का अंतिम और सर्वाधिक शक्तिशाली दिन।
- कार्तिक पूर्णिमा 2026 (नवंबर): देव दीपावली के दिन संगम पर अस्थि विसर्जन — असाधारण शुभ।
किसी भी तिथि पर बुकिंग के लिए हमसे संपर्क करें। पंडित जी आपके परिवार की नक्षत्र स्थिति और दिवंगत की तिथि के आधार पर उस दिन का सर्वोत्तम मुहूर्त निर्धारित करते हैं।
प्रयाग पंडित्स के साथ बुकिंग कैसे करें
बुकिंग सरल है और दुनिया में कहीं से भी, किसी भी समय की जा सकती है:
- ऊपर दी गई तालिका से अपना पैकेज चुनें अपनी आवश्यकताओं और बजट के आधार पर।
- पैकेज लिंक पर क्लिक करके ऑनलाइन बुकिंग पूर्ण करें हमारे सुरक्षित WooCommerce स्टोर पर।
- बुकिंग के 2 घंटे के भीतर पंडित जी आपसे संपर्क करेंगे — दिवंगत का नाम और गोत्र, आपकी आगमन तिथि और समय (या ऑनलाइन के लिए, आपकी पसंदीदा समारोह तिथि) की पुष्टि के लिए।
- प्रयागराज पहुँचें और पंडित जी निर्धारित घाट पर आपसे मिलेंगे। सभी पूजा सामग्री पहले से व्यवस्थित रहती है।
- समारोह पूर्ण शास्त्रीय विधि से संपन्न होगा। समारोह के बाद आपको फोटो और वीडियो प्रदान किए जाते हैं।
बुकिंग में सहायता या समारोह के बारे में किसी भी प्रश्न के लिए आप हमें सीधे +91-7754097777 पर कॉल कर सकते हैं। इस पवित्र अनुष्ठान के आध्यात्मिक आयामों को गहराई से समझने के लिए, हम अनुशंसा करते हैं कि आप हमारी प्रयागराज के लिए संपूर्ण अस्थि विसर्जन मार्गदर्शिका पढ़ें, जिसमें अनुष्ठान, इसका पौराणिक आधार और शोक में परिवारों के लिए मार्गदर्शन शामिल है।
प्रयागराज कैसे पहुँचें — अस्थि विसर्जन के लिए
प्रयागराज (जिसे इलाहाबाद भी कहा जाता है) भारत के सबसे अच्छे तरह से जुड़े हुए शहरों में से एक है, जो पूरे देश और विदेश से आने वाले परिवारों के लिए सुलभ है:
- हवाई मार्ग से: प्रयागराज हवाई अड्डा (IXD) दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद से सीधी उड़ानों के साथ IndiGo, Air India और SpiceJet द्वारा सेवित है। हवाई अड्डा संगम घाट से लगभग 12 किमी दूर है।
- रेल मार्ग से: प्रयागराज जंक्शन (इलाहाबाद जंक्शन, स्टेशन कोड ALD) और प्रयागराज रामबाग जंक्शन दो मुख्य रेलवे स्टेशन हैं, जो एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों के माध्यम से सभी प्रमुख शहरों से जुड़े हैं।
- सड़क मार्ग से: प्रयागराज वाराणसी (120 किमी), लखनऊ (200 किमी), कानपुर (200 किमी) और दिल्ली (640 किमी) से राष्ट्रीय राजमार्गों द्वारा जुड़ा है। AC बसें और निजी टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
- प्रयागराज शहर से संगम घाट तक: रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डे दोनों से ऑटो-रिक्शा, ई-रिक्शा और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं। संगम क्षेत्र प्रयागराज जंक्शन से लगभग 7 किमी दूर है।
प्लेटिनम और गोल्ड सेवा पैकेज धारकों के लिए, प्रयाग पंडित्स हवाई अड्डे या रेलवे स्टेशन से सीधे घाट या आवास तक पिकअप की व्यवस्था करता है। कठिन समय में शहर में नेविगेट करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
जो परिवार गया में पिंड दान या श्राद्ध अनुष्ठान भी करने की योजना बना रहे हैं, प्रयाग पंडित्स कई पवित्र स्थानों पर पितृ कर्मों के पूर्ण अनुक्रम को समन्वित करने में सहायता कर सकता है। हमसे prayagpandits.com पर या +91-7754097777 पर कॉल करके संपर्क करें।
प्रयागराज में अस्थि विसर्जन बुक करें
- प्रयागराज में अस्थि विसर्जन — ₹5,100 (त्रिवेणी संगम समारोह + निजी नाव)
- ठहरने के साथ 2-दिवसीय पैकेज — आवास और ट्रांसफर सहित
- ऑनलाइन/कोरियर सेवा — आपकी ओर से पूर्ण समारोह
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भारत के पवित्र स्थलों पर वेद-प्रशिक्षित पंडितों द्वारा वीडियो प्रमाण सहित प्रामाणिक संस्कार कराए जाते हैं।


