क्या पुत्र न होने पर भीष्म का पिंड दान करने वाला कोई था?
हाँ। भीष्म की मृत्यु के बाद युधिष्ठिर ने स्वयं उनके श्राद्ध और पिंड दान का कार्य किया, और जैविक संबंध से ऊपर उठे पुत्रवत् कर्तव्य को स्वीकार किया। इस प्रसंग ने धर्मसिद्धांत स्थापित किया कि प्रत्यक्ष पुत्र न रहने पर कोई भी श्रद्धावान पुरुष संबंधी, या आध्यात्मिक शिष्य भी, पितृकर्म कर सकता है।
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पिंड दान कराना है?
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