गया पिंड दान के लिए सबसे पवित्र स्थान क्यों है?
पिंड दान एक अनिवार्य वैदिक अनुष्ठान है जिसमें दिवंगत पूर्वजों को पिंड अर्पित किए जाते हैं — ये पिंड तिल, जौ के आटे, शहद और घी से मिश्रित चावल के गोले होते हैं। इसका उद्देश्य आत्मा को शान्ति और मोक्ष प्रदान करना है। बिहार स्थित गया जी का उल्लेख गरुड़ पुराण और वायु पुराण जैसे पवित्र ग्रंथों में पिंड दान के लिए सर्वाधिक शक्तिशाली तीर्थ के रूप में हुआ है, क्योंकि यह मान्यता है कि स्वयं भगवान विष्णु ने यहाँ गयासुर की आत्मा को मुक्ति प्रदान की थी। विष्णुपद मंदिर — जहाँ भगवान विष्णु के चरण-चिह्न विद्यमान हैं — वह केंद्रीय स्थल है जहाँ ये अनुष्ठान सम्पन्न होते हैं। कहा जाता है कि यहाँ पिंड दान करने से उन आत्माओं को भी मुक्ति मिलती है जो प्रेत-योनि में फँसी हों या पितृलोक में कष्ट भोग रही हों।
पिंड दान कराना है?
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