प्रयागराज को पिंड दान के लिए इतना पवित्र तीर्थ क्यों माना जाता है?
प्रयागराज कोई सामान्य स्थान नहीं है — यह तीर्थराज है, समस्त तीर्थों का राजा। यहाँ की धरती स्वयं धन्य है। इसी प्रयागराज में स्वयं ब्रह्मा जी ने सृष्टि के आरंभ में प्रथम यज्ञ किया था। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि प्रयागराज में त्रिवेणी संगम स्थित है — माँ गंगा, माँ यमुना और अदृश्य, रहस्यमयी माँ सरस्वती का पवित्र संगम।
मत्स्य पुराण सहित हमारे शास्त्र घोषित करते हैं कि प्रयागराज के संगम पर श्राद्ध और पिंड दान करने से जो पुण्य मिलता है, वह अन्य स्थानों की तुलना में लाखों गुना अधिक होता है। संगम-स्नान से पाप धुल जाते हैं, और माना जाता है कि यहाँ किए गए अर्पण सीधे पितृगण तक पहुँचते हैं — जिससे उन्हें परम संतोष मिलता है और उनकी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इन तीन पवित्र नदियों की संयुक्त शक्ति प्रयागराज में किए जाने वाले पिंडदान को असाधारण रूप से प्रभावशाली बनाती है।
पिंड दान कराना है?
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